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Tuesday, October 30, 2012

वीर्यवर्धक प्रयोग :-

४-५ खजूर वीर्यवर्धक के लिए, एक चम्मच मक्खन, एक इलाइची, थोडा-सा जायफल पानी में घीस के मिला दे | सुबह खाली पेट ले | शरीर मजबूत हो जायेगा |

Tip to rejuvenate body

4-5 pieces of dates for semen growth, one spoon of butter, one Cardamom(Elaichi), a little Ntumeg (Jaiphal), grind these together in water. Take this mixture in the morning on an empty stomach. This will strengthen the body.

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- Pujya Bapuji Ujjain 21st Oct' 2012

शीत ऋतू में स्वास्थवर्धक प्रयोग :-


स्वास्थ्य की रक्षा की कुछ बाते जान ले और शरीर स्वस्थ रहे :-

1) गाजर का हलवा :- गाजर का पीला हिस्सा निकाल दिया, उसमें लोहतत्व और विटामिन्स ‘ए’ भरपूर मात्रा में है | गाजर का हलवा बना रखा ... फ्रिज है तो रखे ...रोज खा सकते है |

इसके फायदे - इससे खून बढ़ता है, नेत्रज्योति बढती है, हृदय और मस्तिक के लिए लाभदायक है और वायुशामक है | ८० प्रकार की बीमारियाँ वायु से होती है | गाजर का हलवा वायु को मारता है | गाजर वायु नाशक है |

2) खजूर और सिंघाड़े :- सिंघाड़े का प्योर आटा मिलेगा ४०,४२,४५ रूपये किलो तक | सिंघाड़े का आटा घी में सेक लिया | जितना आटा सिंघाड़े का घी में सेका उतना खजूर कुचल के दोनों मिलाकर आटा बना लिया जैसे भाकरी, रोटी बनाते ऐसा आटा बन गया | उसे ५-६ ग्राम की गोली-लड्डू बना लिया | सुबह चबा-चबाके दो-तीन खाये फिर थोड़ी देर कुछ न खाये, भूख लगी तो दूध पीयो |

इसके फायदे - वे गोलियाँ जल्दी से खून बनायेगी, वीर्य बनायेगी, बल बनायेगी, जीवन में उत्साह वृद्धि, प्रसन्नता और चेहरे पर निखार, सौंदर्य, गर्भ पोषक और माँ के दूध में वृद्धि करनेवाली, पुरुष का वीर्य भी इससे बढ़ता है, बुढ़ापे को जवानी में ये बदल सकता है और सस्ता भी है | ये सर्दी पाक बड़ा ताकत देता है |

3) मेथी की सुखडी :- मेथी का आटा, मेथी पीस ली आटा बन गया | मेथी आटा घी में सेककर पुराना गुड, थोडी-सी सौंठ मिलाकर सुखडी बना दी |

इसके फायदे - ये सुखडी खाने से महिलाओं को कमरदर्द, बाईओ कों-भाईओ को जोडों का दर्द, सायटिका, हड्डीयों की कमजोरी सब ठीक हो जायेगा |

4) चन्द्रशूर की खीर :- ये सर्दियों में खाने योग्य चन्द्रशूर की खीर (पंसारी के यहाँ मिलाता है चन्द्रशूर) उसमें लोहतत्व, फोसफोरस और कँल्शियम होने से कमरदर्द दूर करने की उसमें क्षमता है | १२ वर्ष ऊपर के बच्चे को ४० दिन तक खिलाये सुबह खाली पेट ..... उनका कद बढ़ेगा और दुसरे लोग भी खायेंगे तो शरीर में मजबूती होगी |


Key Health Tips for Winter :-

Some key health related tips for winter season

1) Carrot porridge: Scrape out the inner yellow core of the carrots, use carrots as they are rich in iron and vitamin 'A'. Make sufficient quantity and keep it in the fridge.... can be taken daily.

Benefits: This improves blood growth and eye power. It is also beneficial for heart and head, and eliminates wind related problems. There are 80 types of diseases that can occur due to wind. Carrot porridge inhibits effect of wind.

2) Dates and Water chestnuts(Singhada or Paniphal): Pure flour made of water chesnuts are available for 40-45 Rs. per kilo. Fry this flour with ghee first. Then, mash equal quantities of dates and made a dough using it. Make small tablets or dumpling each weighing 5-6 grams. Take 2 -3 tablets in the morning. Chew them properly and donot eat anything for a while... If hungry, you can drink milk.

Benefits: These tablets will swiftly aid in blood growth, semen growth, deliver strength, bring forth enthusiasm in life, happiness and glowing radiance on face, beauty, provides strength to women who are conceiving a baby and aids formation of breast milk and can also rejuvenate oldage. This technique is quite inexpensive too. This winter medicine delivers a lot of strength.

3) Fenugreek(Methi) Sukhdi: Take methi flour and fry it with ghee along with old jaggery, then mix with dry ginger and make sukhdi.

Benefits: Taking this helps remove back ache in women, joint pain in men-women, sciatica, weakness in bones.

4) Garden cress(Chandrashoor pudding): During winter, make pudding from chandrashoor which is high in iron, phosphorus and calcium content. This helps remove back-pains. For children above 12 years, they should have this regularly for 40 days every morning on an empty stomach... this will aid body growth and will offer strength to others as well.

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- Pujya Bapuji Ujjain 21st Oct' 2012


बलसंवर्धक शीत ऋतू
(२२ अक्टूबर २०१२ से १७ फरवरी २०१३ तक)

आध्यात्मिक भोजन
आत्मदृष्टि के बिना शरीरपुष्टि निरर्थक है | अत: पकृत भोजन के साथ आध्यात्मिक भोजन भी आवश्यक है | सत्शास्त्र-पठन,सत्संग का श्रवण-मनन तथा तदनुसार आचरण यह उसका स्वरुप है | इस आहार से आत्मा की तुष्टि-पुष्टि होती है | आत्मबल के उत्कर्ष से ही सच्चे स्वास्थ्य व सच्चे जीवन की प्राप्ति होती है |

महर्षि कश्यप ने कहा है : न च आहारसम किंचित भैषज्यं उपलभ्यते |
देश, काल,प्रकृति, मात्रा व जठराग्नि के अनुसार लिये गये आहार के समान कोई औषधि नहीं है | केवल सम्यक आहार-विहार से व्यक्ति उत्तम स्वास्थ्य व् दीर्घ आयु की प्राप्ति कर सकता है | प्रदीप्त जठराग्नि के कारण शीत ऋतू पौष्टिक व बलवर्धक आहार सेवन के लिए अनुकूल होती है | इन दिनों में उपवास, अल्प व रुखा आहार सप्तधातु तथा बल का ह्रास करता है |

शीतकाल में सेवन योग्य पुष्टिदायी व्यंजन :
१) गाजर का हलवा : गाजर में लौह तत्व व विटामिन ‘ए’ काफी मात्र में पाये जाते है | यह वायुशामक,ह्रदय व मस्तिष्क की नस- के लिए बलप्रद, रक्तवर्धक व नेत्रों के लिए लाभदायी है | 
विधि : गाजर के भीतर का पीला भाग हटा के उसे कद्दूकस कर घी में सेंक लें | आधी मात्र में मिश्री मिलाकर धीमी आँच पर पकाये | तैयार होने पर इलायची, मगजकरी के बीज व थोड़ी-सी खसखस डाल दें | (दूध का उपयोग न करे |)
२) कद्दू के बीज की बर्फी : काजू में जैसे मौलिक व पुष्टिदायी तत्व पाए जाते है, वैसे ही कद्दू के बीजों में भी होते है | बीज की गिरी को घी में सेंक के समभाग चीनी मिला के बर्फी या छोटे-छोटे लड्डू बना लें | एक – दो लड्डू सुबह चबा-चबाकर खाए |
विशेस रूप से बालकों के लिए यह स्वादिष्ट, बल व बुद्धिवर्धक खुराक है |
३) खजूर की पुष्टिदायी गोलियाँ : सिघांड़े के आते को घी में सेंक ले | आते के समभाग खजूर को मिक्सी में पीसकर उसमें मिला ले | हलका सा सेंककर बेर के आकार की गोलियाँ बना लें | २-४ गोलियाँ सुबह चूसकर खायें, थोड़ी देर बाद दूध पियें | इससे अतिशीघ्रता से रक्त की वृद्धी होती है | उत्साह, प्रसन्नता व वर्ण में निखार आता है | गर्भिणी माताएँ छठे महीने से यह प्रयोग शुरू करे | इससे गर्भ का पोषण व प्रसव के बाद दूध में वृद्धी होगी | माताएँ बालकों को हानिकारक चॉकलेटस की जगह ये पुष्टिदायी गोलियाँ खिलायें |
४) वीर्यवर्धक योग : ४-५ खजूर रात को पानी में भिगो के रखे | सुबह १ चम्मच मक्खन, १ इलायची व थोडा – सा जायफल पानी में घिसकर उसमें मिला के खली पेट लें | यह वीर्यवर्धक प्रयोग हो |
५) मेथी की सुखडी : मेथीदाना हड्डियों व जोड़ों को मजबूत बनाता है | मेथी का आटा, पुराना गुड व घी समान भाग लें | आटा घी में सेंक के पुराना गुड व थोड़ी सोंठ मिलाकर सुखडी (बर्फी) बना लें | यह उत्तम वायुशामक योग हाथ-पैर, कमर व जोड़ों के दर्द, सायटिका तथा दुग्धपान करनेवाली माताओं व प्रौढ़ व्यक्तिओं के लिए विशेष लाभदायी है | 
६) चन्द्रशूर की खीर : चन्द्रशुर (हालों) में प्रचंड मात्रा में लौह, फॅास्फोरस व कैल्शियम पाया जाता है | १२ वर्ष से ऊपर के बालकों को इसकी खीर बनाकर सुबह खली पेट ४० दिन तक खिलाने से कद बढ़ता है | माताओं को दूध बढ़ाने के लिए यह खीर खिलाने का परम्परागत रिवाज है | इससे कमर का दर्द, सायटिका व पुराने गठिया में भी फायदा होता है |
सूचना : पौष्टिक पदार्थों का सेवन सुबह खली पेट अपनी पाचनशक्ति के अनुसार करने से पोषक तत्वों का अवशोषण ठीक से होता है |उनका सम्यक पाचन होने पर ही भोजन करना चाहिए |  


Winter : The season to build bodily strength :-
 
Food for the Spirit Nourishment of the body is useless in absence of Self-satisfaction. Therefore, spiritual food too should be taken along with physical food. It includes reading of spiritual books; hearing satsang discourses, reflecting on and practice of the teachings. This food satiates and nourishes the Self. Elevation of Self-force alone helps one enjoy true health and true life.
Maharishi Kashyap says,
न च आहारसमं किंचित भैषज्यं उपलभ्यते ।
‘There is no medicine equal to food taken appropriate to time (season), place, one’s constitution, requirement and appropriate food and mode of living, one can have best health and long life.
Because of increased appetite, winter is suitable for consumption of nutritious and strength-promoting foods. Fasting or taking less food and dry substances depletes the seven Dhatus and strength in this season.
Nutritious dishes for the winter:
(1)       Carrot halua: Carrot is a rich source of iron and vitamin A. It pacifies Vata. It strengthens the heart and nervous systems. It is blood-promoting and good for eyes.
Method of preparations: Grate carrots and then fry it in ghee. The central yellow portion of the carrots should be removed before grating. Add sugar candy equal to half the quantity of grated carrots and cook on a low flame.  Add cardamom, watermelon seeds and poppy seeds to it when it is cooked. Don’t add milk.
(2)       Pumpkin seeds barfi: Pumpkin seeds contain essential nutrients like cashew nuts. Fry the kernels of pumpkin seeds in ghee and mix with equal quantity of sugar. Make it into small balls (laddoos) or cut it in cuboids. Eat one or two laddoos in the morning with good mastication. It is especially beneficial for children. It increases their physical strength intellect and it is tasteful.
(3)       Nourishing date sweets: Fry the flour of dried water chestnuts in ghee. Mix it with equal quantity of dates with the help of a mixer-grinder. Fry again for a little while and make small jujube sized tablets. Suck 2-4 tables in the morning followed by milk. It rapidly increases blood formation. It makes one energetic, cheerful and improves complexion. Pregnant women should start taking this from 6th month of gestation. It nourishes the foctus and increases lactation after delivery. Mothers should give these tablets to their children in place of harmful chocolates.
(4)       A semen-promoting yoga :  Soak 4-5 soft dates in water overnight. Mix it with a teaspoonful of butter, one cardamom and a little of nutmeg outer covering of the nutmegouter in the morning and take it on an empty stomach. It is semen-promoting.
(5)       Fenugreek sweets : Fenugreek seeds strengths the bones and joints. Take fenugreek seeds powder, old gur and ghee in equal quantities. Fry the fenugreek powder in ghee, and mix it with jiggery and a little dry ginger. Cut it in cuboids. This is an excellent Vata pacifier. It is useful in pains in limbs, backache, joint pains and sciatica. It is beneficial for lactating mothers and the aged.
(6)       Water Cress pudding: Chandra-shurs (Lepidium Sativum) contains iron, calcium and phosphorus in abundant quantities. Water Cress pudding (prepared by boiling it in milk and adding sugar) taken on an empty stomach for forty days by children above 12 years of age increases their height. It is a custom in India to give it to the lactating mothers. It helps in backache, sciatica and chromic goat.
Note: Nutritious foods should be taken on an empty stomach and according to one’s digestive capacity for proper absorption of its nutrients. Regular meals should be taken after the nutritious foods are completely digested.

- Rishi Prasad Nov' 2012





Friday, October 26, 2012

Do Tratak

नेत्रज्‍योति बढ़ाने के लिये दशहरे (13.10.13) से शरदपूर्णिमा (18.10.13) तक प्रतिदिन रात्रि में 15 से 20 मिनट तक चंद्रमा के आगे त्राटक (पलकें झपकाये बिना एकटक देखना) करें । 

  • Do Tratak on moon for 15-20 mins. in night from Dussehera to Sharad poornima.  (13th Oct' 2013 to 18th Oct' 2013)
  • To look with a constant gaze without blinking the eye lids, is called Tratak.
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- Pujya Bapuji Indore 14th Oct' 2012

दमा के मरीजों के लिए

दमा के मरीजों के लिए

पूज्य बापूजी के आशीर्वाद रूप में तैयार बूटी पूज्य बापूजी के लगभग सभी आश्रमों में शरद पूनम की रात को खीर (१८'अक्तूबर २०१३) में मिलाकर उपलब्ध कराई जाती है कृपया अपने बूटी की उपलब्धता के लिए अपने निकटतम आश्रम में संपर्क करें ।

For Asthma Patients

Pujya Bapuji have showered his blessings to make available the booti which is mixed with Kheer on Sharad Poonam Night (18th Oct' 2013) in almost all ashrams of Pujya Bapuji-Please ask your nearest ashram for available booti.

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आँखों के लिए टॉनिक

आँखों के लिए टॉनिक

त्रिफला, शहद और देसी गाय के शुद्ध घी का 02:02:01 के अनुपात में मिश्रण तैयार करके उसे शरद पूनम की पूरी रात (१८ अक्तूबर २०१३) को चांदनी में रखो । फिर उस मिश्रण को काँच की बाटल में रख लें । फिर अगले 40 दिनों तक इस मिश्रण को 11 ग्राम सुबह शाम लें । आंखें टनाटन, न मोतिया न मोतियाबिंद न लेंस ।

For those who have Eye problem

Make a mixture of Trifla , Honey, Ghee (of Desi Cow), in ratio 2:2:1. Put the mixture in the Sharad Poonam (18th Oct' 2013) moonlight, for whole night. then keep mixture in a glass bottle.Then for next 40 days, eat 11gm. mixture twice- morning n evening. Eyes tanatan. No motiya, no cataract, no lenses.

- Pujya Bapuji

शरद पूर्णिमा पर अध्यात्मिक उन्नति

शरद पूर्णिमा पर अध्यात्मिक उन्नति

शरद पूनम रात (१८ अक्तूबर २०१३) आध्यात्मिक उत्थान के लिए बहुत फायदेमंद है । इसलिए सबको इस रात को जागरण करना चाहिए अर्थात जहाँ तक संभव हो सोना नही चाहिए और इस पवित्र रात्रि में जप, ध्यान, कीर्तन करना चाहिए ।

Do Jaagran

Sharad Poonam (18th Oct' 2013) Night is very beneficial for spiritual upliftment, hence one should do Jaagran on this night, i.e. as possible don't sleep and do Japa Dhyan Kirtan on this holy night.

- Pujya Bapuji 

नेत्र सुरक्षा के लिए शरद पूर्णिमा का प्रयोग

नेत्र सुरक्षा के लिए शरद पूर्णिमा का प्रयोग
वर्षभर आंखें स्वस्थ रहे, इसके लिए शरद पूनम (१८ अक्तूबर २०१३) की रात को चन्द्रमा की चांदनी में एक सुई में धागा पिरोने का प्रयास करें । कोई अन्य प्रकाश नहीं होना चाहिए ।

To free from Eye troubles

For Eyes to work properly whole year, try to put thread in a needle in Sharad Poonam (18th Oct' 2013) Moonlight. (No other light should be nearby).

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- Pujya Bapuji Indore 14th Oct' 2012

शरद पूर्णिमा विशेष

शरद पूर्णिमा विशेष

चावल, दूध और मिश्री की खीर बनायें । खीर बनाते समय उसमें कुछ समय के लिए थोड़ा सोना या चाँदी मिला दें । खीर को कम से कम 2 घंटे के लिए चन्द्रमा के प्रकाश में रख दें । उस दिन के लिए कोई अन्य भोजन नहीं पकाएं, केवल खीर खाएं । हमें देर रात को भारी आहार नहीं लेना चाहिए इसलिए तदनुसार खीर खाएं । शरद पूनम की रात में रखी गयी खीर को पूज्य गुरुदेव को भोग लगाने के बाद अगले दिन प्रसाद रूप में नाश्ते में भी ले सकते है । शरद पूर्णिमा १८ अक्तूबर २०१३ को है ।

On Sharad Poonam

Make kheer of Rice, Milk, Mishri, Put some gold or silver for sometime while making Kheer then place it in Moonlight for atleast 2 hours. Don't cook any other food for that day, only eat Kheer. We should not take heavy diet in late night, hence eat Kheer accordingly. The Kheer which is placed in Sharad Poonam night can also be taken in next day break-fast after making it as Prasad by offering it to Pujya Gurudev.

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- Pujya Bapuji  Indore 14th Oct' 2012

Sharad Poonam :- 18th Oct' 2013

नेत्रज्योति बढ़ाने के लिए

११ से १५ मिनट तक चंद्रमा को एकटक देखें और आँखों को पटपटायें और फिर देखें | शरद पूनम की रात को खीर बनाकर चंद्रमा की किरणों में रखें और चंद्रमा को एकटक देखते हुए जप करें | नेत्र ज्योति और स्वभाव में शीतलता बढती है |

Improving Eyesight :-

Fix your gaze on the moon for 11-15 minutes, blink a few times and then repeat the exercise. Make rice pudding on the full moon night of Sharad month and bathe it in moonlight. Do japa of Gurumantra while fixing your gaze on the moon. This helps improve eyesight and also brings forth calmness in behavior.

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- Pujya Bapuji 5th Aug’09, Noida

त्रिफला रसायन कल्प

त्रिफला रसायन कल्प

सर्व नेत्ररोगनिवारक, मेधादृष्टिवर्धक
त्रिफला रसायन कल्प त्रिदोषनाशक, इंद्रिय बलवर्धक विशेषतः नेत्रों के लिए हितकर, वृद्धावस्था को रोकने वाला व मेधाशक्ति बढ़ाने वाला है। इसके सेवन से नेत्रज्योति में आश्चर्यजनक वृद्धि होती है। दृष्टिमाद्य, रतौंधी, मोतियाबिंदु, काँचबिंदु आदि नेत्ररोगों से रक्षा होती है। बाल काले, घने व मजबूत बनते हैं। 40 दिन तक विधियुक्त सेवन करने से स्मृति, बुद्धि, बल व वीर्य में वृद्धि होती है। 60 दिन तक सेवन करने से यह विशेष प्रभाव दिखाता है। जगजाहिर है कि इस प्रयोग से पूज्य बापू जी अदभुत लाभ हुआ है, चश्मा उतर गया है।
विधिः शरदपूर्णिमा की रात को चाँदी के पात्र में 350 ग्राम त्रिफला चूर्ण, 350 ग्राम देसी गाय का घी व 175 ग्राम शुद्ध शहद मिलाकर पात्र को पतले सफेद वस्त्र से ढँक कर रात भर चाँदनी में रखें। दूसरे दिन सुबह इस मिश्रण को काँच अथवा चीनी के पात्र में भर लें। (उपर्युक्त मात्राएँ 40 दिन के प्रयोग के लिए हैं। 60 दिन के प्रयोग के लिए त्रिफला, घी व शहद की मात्राएँ डेढ़ गुनी लें।)
सेवन-विधिः 11 ग्राम मिश्रण सुबह-शाम गुनगुने पानी के साथ लें (बालकों के लिए मात्रा 6 ग्राम)
दिन में केवल एक बार सात्त्विक, सुपाच्य भोजन करें। इन दिनों में भोजन में नमक कम हो तो अच्छा है। साधारण नमक की जगह सेंधा नमक का उपयोग विशेष लाभदायक है। सुबह शाम गाय का दूध ले सकते हैं। दूध व रसायन के सेवन में दो ढाई घंटे का अंतर रखना आवश्यक है। कल्प के दिनों में खट्टे, तले हुए, मिर्च-मसालेयुक्तपचने में भारी पदार्थों का सेवन निषिद्ध है। इन दिनों में केवल दूध-चावल, दूध-दलिया अथवा दूध-रोटी का सेवन अधिक गुणकारी है।
इस प्रयोग के बाद 40 दिन तक मामरा बादाम का उपयोग विशेष लाभदायी होगा। कल्प के दिनों में नेत्रबिन्दु का प्रयोग अवश्य करें।

Triphala Rasayan Kalp

Removes all eye ailments, improves eyesight and intelligence

Triphala Rasayan Kalp is beneficial in removing all three doshas in the body, strengthens our senses especially our eyes, inhibits onset of old age and improves intelligence. Consuming this has a positive effect on eyesight. It protects from ambliopia, cataract, night blindness, glaucoma, etc. other aye ailments. It maintains dark, dense and strong hair. Regular use of this for 40 days will improve memory, intelligence, stamina and semen. With its use for 60 days, it shows remarkable new effects. It is proven that even Pujya Bapuji got rid of his spectacles through this application.

Procedure: On the full moon night of Shard Purnima, mix 350 grams of Triphala Churna, 350 grams of pure, indigenous cow ghee and 175 grams of pure honey in a silver bowl and keep it overnight covered by a thin white piece of cloth. Next day morning, store this mixture in a glass or porcelain container. These quantities have been specified for a 40 day course. For a 60 day course, increase the quantity of ghee and honey by one and half times.

Dosage: Take 11 grams of this mixture with luke warm water in the morning and evening daily. Children to be given only 6 grams.
Take only one simple course of meal in a day, something which is easily digestible. Reducing salt content in food during this dosage period is also beneficial. You can take cow milk in the morning and evenings. Maintain atleast 2-2.25 hours interval between taking milk and this mixture. During this period, abstain from sour,oily, spicy and heavy foods. In these days, simply having milk-rice, milk-dahlia or milk-roti is considered highly beneficial.

After this course, taking Mamri badam(Almond -ghee-rock sugar mix) for next 40 days offers special benefits. During the days of this dosage, also apply Netrabindu eyedrops.

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Tuesday, October 23, 2012

दशहरे के दिन

  दशहरा(१३ अक्तूबर २०१३) के दिन शाम को जब सूर्यास्त होने का समय और आकाश में तारे उदय होने का समय हो वो सर्व सिद्धिदायी विजय काल कहलाता है |
उस समय घूमने-फिरने मत जाना | दशहरा मैदान मत खोजना ... रावण जलाता हो देखकर क्या मिलेगा ? धूल उड़ती होगी, मिटटी उड़ती होगी रावण को जलाया उसका धुआं वातावरण मे होगा .... गंदा वो श्वास में लेना .... धूल, मिटटी श्वास में लेना पागलपन है | 
ये दशहरे के दिन शाम को घर पे ही स्नान आदि करके, दिन के कपडे बदल के शाम को धुले हुए कपडे पहनकर ज्योत जलाकर बैठ जाये | थोडा 
" राम रामाय नम: ।  " 
मंत्र जपते, विजयादशमी है ना तो रामजी का नाम और फिर मन-ही-मन  गुरुदेव को प्रणाम करके गुरुदेव सर्व सिद्धिदायी विजयकाल चल रहा है की हम विजय के लिए ये मंत्र जपते है -
" अपराजितायै नमः " 
ये मंत्र १ - २ माला जप करना और 

इस काल में श्री हनुमानजी का सुमिरन करते हुए इस मंत्र की एक माला जप करें :-

"पवन तनय बल पवन समाना, बुद्धि विवेक विज्ञान निधाना ।
कवन सो काज कठिन जग माहि, जो नहीं होत तात तुम पाहि ॥"
पवन तनय समाना की भी १ माला कर ले उस विजय काल में, फिर गुरुमंत्र की माला कर ले । फिर देखो अगले साल की दशहरा तक गृहस्थ में जीनेवाले को बहुत-बहुत अच्छे परिणाम देखने को मिल सकते है |

On the eve of Dashahra

The evening time of Dashahra (13 Oct' 2013)when the sun is about to set and the stars are about to rise in the sky is considered as the Vijay Kaal ('Victory period for Supreme accomplishment')

During this period, do not roam outside. DO not search for a Dashahra ground.... what is the point in watching Ravana being set on fire ? There is dust all around, the environment is smoky due to the burnt out remains. Breathing in such dusty and smoky atmosphere is madness.

On the day of Dashahra, stay at home, wear fresh clothes and light a lamp and sit for prayers.
Do japa of the mantra: "RAM RAMAYA NAMAH "

One must do japa and meditation, then remember Lord Rama as it is the eve of Dashahra, then pray to Gurudev and ask for victory in this supreme victory period for accomplishments by recitation of this mantra for 1-2 malas.
" AUM APARAJITAYE NAMAH"
During this period, one must also remember Lord Hanuman and recite one mala of the following mantra:

PAVAN TANAY BAL PAVAN SAMANA, BUDDHI VIVEK VIGYAAN NIDHAANA |
KAVAN SO KAAJ KATHIN JAG MAHI, JO NAHI HOT TAAT TUM PAHI ||


One can also do recitation of one mala of 'Pavan Tanaya Samana' mantra during this period, then do recitation of Guru Mantra as well.

If you do this, then you will reap the benefits of much superior outcomes in your family life for the upcoming year by next Dashahra.

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Sureshanandji Faridabad - 29th Sep.2012